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चाय के होटल की कहानी,उसी अंदाज़ में हमारी जबानी
November 25, 2019 • Faisal Hayat

  कानपुर । कल मुझ को चाय की तलब लगी तो अकेला ही चाय पीने हलीम कॉलेज चौराहे पहुँचा । मैंने एक स्पेशल चाय ली होटल के अंदर चाय की चुस्की ले ही रहा था कि मन हुआ  खुले में खुली हवा में चाय पी जाए ये सोच कर मै चाय के होटल से निकल के चाय के साथ सड़क पर आ गया । वही रिक्शे पे बैठे दो लोग भी चाय का मज़ा लेते हुए बाते कर रहे थे । फिर क्या कहना मेरी पत्रकारिता जाग गई और मैंने अपने कान लगा दिए । मेरी चाय तो खत्म हो गई लेकिन उन की बातों को सुनने की जिज्ञासा जाग गई । उन दोनों के बीच बात चीत कुछ इस तरह थी भय्या आज कल चमन एरिये के दो लड़के एक दूसरे के लिए बहुत उलझ रहे हैं दूसरे साथी ने पूछा कौन ? पहले ने जवाब दिया समझा करो बे क्या खुल के नाम बताएं तुम्हे नही पता का की दीवारों के भी कान होते हैं अरे वही जो इसी क्षेत्र से टॉप टेन हैं । हालातो ने एक को पिच्चा बना दिया तो दूसरे को सट्टेबाज़ बदमाश जहां एक गोली चला के कमाने में विश्वास रखता हैं वहीं दूसरा राहजनी,सट्टा,जुआ,व नशीले पदार्थ बेच के ये पार्षदी का चुनाव भी लड़े रहे । कभी भूत काल मे अंडरवियर फ्रेंड हुआ करते और वर्तमान में जानी दुश्मन हालाकि दोनों शक्ल सूरत से चीकू लाइट लगते हैं दोनों मिल कर वन टू का फोर कर के खूब ₹ कमाईन जहाँ ज़रूरत पड़ी वहां किसी न किसी को टपका भी दीन । जिन की लिस्ट सम्बंधित थाने में मौजूद है । भय्या एक कांड कर के हवेली चले गए । जब तक दूसरे ने कार्य भार सम्भाला जब वो वापिस आये तो भय्या लेन देन में लफड़ा हो गया भय्या जैसा कहा जाता है बाप ना भय्या सब से बड़ा रुपय्या तब से अब तक इसी बात की दुश्मनी चली आ रही । कभी हवा चली की चहते विधायक ने दोनों की दोस्ती करा दी  लेकिन भय्या मुँह पे कहते रहे हाँ, हां लेकिन दोनों अपने अपने क्रोध को पालते रहे । वर्चस्व के लिए एक दुसरे के आमने सामने आ कर कभी नही लड़े विधायक जी का सम्मान तो रखना ही था । परन्तु अपने साथियों के कंधे पे रख के बन्दूक एक दूसरे पे चलाते रहे । शहर में कांड एक करें लेकिन सेटिंग ऐसी करें कि आरोप दूसरे पे लगे इसी सब मे वर्तमान में नया खेल चल रहा सट्टेबाज़ बदमाश ने अपने ही साथी (जो खुद भी अपराधी) क्षेत्र द्वारा बनाएं पिच्चा पे रंग दारी का मुकदमा करा दिया जिस की विवेचना चल रही है अभी तक एक दुसरे फ़साने में अपनी अपनी नीति चला रहे थे । अब आया नया मोड़ कुछ साथी पत्रकार भी इन दोनों के साथ हो लिए । जो अपनी कलम से अपने पक्षकार का पक्ष रख कर मौज ले रहे हैं । दूसरे वाले ने बड़ी मासूमियत से पूछा शहर में प्रशासन इतना सक्रिय है शतक से ऊपर हाफ काउंटर हो गए इन लोगो का कुछ नही हुआ । पहले वाले ने गुस्से में जवाब दिया तुम पगले हो तुम्हे नही पता ₹ कितनी ताकत होती की ये लोग खाकी और खादी साथ मे रखते हैं । पूरे शहर में चेकिंग होती रहती है उस के बावजूद चैन स्नैचिंग, लूट आदि हो जाती है कि नही  फिर दोनों ने छोटू को आवाज़ दी चाय ₹ गिलास दिए और बोले हम लोगो से क्या लेना देना चलो चलते हैं तुम्हारी भाभी ने कहा था बच्चे का दूध लेते आना देर हो है । ये कहते हुए दोनों चले गए ।
भगवान जाने दोनों की बातों में कितनी सच्चाई है उन दोनों के चले जाने के बाद मैं भी इस उम्मीद के साथ चला आया कि फिर कभी ऐसे ही लोगो की बात सुनने का मौका मिले । हाँ आप लोगो से भी हमारा वादा है कभी ऐसा मौका मिला तो फिर आप लोगो को भी बताऊंगा ।