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धार्मिक स्वतंत्रता हमारी संस्कृत की नींव है-ज्योति बाबा
January 27, 2020 • Faisal Hayat • Social

 कानपुर l एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 84% से काफी ज्यादा लोग स्वर्णिम भारत के लिए समान नागरिक संहिता के पक्ष में हैं उपरोक्त बात श्री गणेश लक्ष्मी मूर्ति विसर्जन सेवा संस्थान व सोसायटी योग ज्योति इंडिया के तत्वाधान में 71 वे गणतंत्र दिवस के अवसर पर नशा मुक्ति युवा भारत व गंगा प्रदूषण मुक्त अभियान के तहत महाराणा मंदिर रावतपुर में आयोजित राष्ट्रीय एकता व अखंडता में हमारी भूमिका पर आयोजित परिचर्चा में अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्त अभियान के प्रमुख योग गुरु ज्योति बाबा ने कही ,ज्योति बाबा श्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक बार नहीं कम से कम 3 बार से ज्यादा बार नागरिक संहिता कानून बनाने को कह चुका है, शाहबानो मामले में मुख्य न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ ने फैसले में लिखा धार्मिक स्वतंत्रता हमारी संस्कृत की नींव है लेकिन जो धार्मिक रीत मनुष्य की मर्यादा मानव अधिकार का उल्लंघन करती हो वह स्वतंत्रता नहीं उत्पीड़न है इसीलिए पीड़ितों की रक्षा और राष्ट्रीय एकता के विकास के लिए एक समान नागरिक संहिता परम आवश्यक है इससे पूर्व झंडारोहण कार्यक्रम को विधिवत गुटैया व्यापार मंडल के अध्यक्ष माननीय राजीव सिंह के कर कमलों द्वारा किया गया , उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गणतंत्र दिवस पर हमें नए संकल्पों का भारत बनाने हेतु 133 करोड़ भारतीयों के साथ कदमताल करनी होगी और इसीलिए समान नागरिक संहिता समय की मांग है l अध्यक्षता करते हुए महंत राम अवतार दास जी ने कहा कि हर भारतीय हमें प्राणों से भी ज्यादा प्यारा है हम वतन की शान और आन हैं तिरंगे को एकता की नित नई ऊंचाइयों में लहराने हेतु सभी का साथ और विकास मानव धर्म है l
संचालन करते हुए अनिल सैनी एडवोकेट ने कहा कि भारत में समान नागरिक कानून हो यह संविधान सभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों में भी कहा जा चुका है l 
अंत में सभी को राष्ट्रीय एकता अखंडता ,नशा मुक्त युवा भारत व मां गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने की महाशपथ योग गुरु ज्योति बाबा ने दिलाई l
इस अवसर पर देश प्रेम के गीत गाने व नारे लगाने के साथ लोगों को मिठाइयां वितरित की गई l
अन्य भाग लेने वाले प्रमुख श्री अरुण जायसवाल, लखन दीक्षित, मुन्ना चौरसिया , संजय सिंह, चंद्रजीत ,राजू सिंह, विजय चक कश्मीरी पंडित, सचिन कुमार दुर्गाशंकर, कमलावती ,सुंदरा इत्यादि थे ।