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धर्म के आधार पर भेदभाव कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा - मुफ्ती काजिम रजा ओवैसी
December 13, 2019 • Faisal Hayat • Social

 

हम, प्रवासियों को नागरिकता देने का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन धर्म के आधार पर भेदभाव कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा - मुफ्ती काजिम रजा ओवैसी

प्रवासी खुद ही एक वर्ग है इसलिए जो भी कानून उन पर लागू हो वो बिना किसी जाति, धर्म और राष्ट्रीयता के आधार पर होना चाहिए - मोहम्मद इमरान खान छन्गा पठान 

कानपुर । आज दिनाँक 13 दिसम्बर 2019 को जूही लाल कॉलोनी स्थित 22 ब्लॉक मदरसा तालिमुल कुरान अहले सुन्नत से कुआं वाला चौराहा, जूही लाल कॉलोनी तक जुमे की नमाज़ के बाद हाथो में काली पट्टी बाँध कर पैदल मार्च निकाल कर विरोध दर्ज किया गया उक्त विरोध उलमा ए एकराम व मुस्लिम समाज के लोगों के साथ विरोध दर्ज बिल की प्रतियां जलायी गई विरोध कर ज्ञापन थानाध्यक्ष किदवई नगर को सौंपा गया द्वारा:- श्रीमान जिलाधिकारी महोदय, कानपुर नगर। जो महामहीम राष्ट्रपति महोदय को संबोधित है। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 यह अधिनियम संशोधन जिसे सोमवार को लोकसभा और बुधवार को राज्यसाभा ने मंजूरी दे दी, पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के मानदंडों को उदार बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करता है। हम, प्रवासियों को नागरिकता देने का विरोध नहीं करते, लेकिन धर्म के आधार पर भेदभाव और अवैध वर्गीकरण से दुखी हैं। अधिनियम से मुसलमानों का बहिष्कार किया गया है जिससे धर्म आधारित भेदभाव हुआ। अवैध प्रवासी खुद ही एक वर्ग है और इसलिए जो भी कानून उन पर लागू होता है, वह बिना किसी धर्म, जाति या राष्ट्रीयता के आधार पर होना चाहिए। अधिनियम द्वारा किया गया धार्मिक भेदभाव बिना किसी उचित कारण के है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है। भारतीय संविधान केवल जन्म, वंश या अधिग्रहण के आधार पर नागरिकता को मान्यता देता है। यह अधिनियम धर्म को नागरिकता का मापदंड बनाता है। धर्म को नागरिकता से जोड़ना धर्मनिरपेक्षता का विरोध है, जो संविधान की मूल संरचना का एक हिस्सा है। केंद्र सरकार ने संशोधन को उचित ठहराते हुए कहा कि यह धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए आवश्यक है जो भारत की सीमा से लगे देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इस पर सवाल उठता है कि श्रीलंका और भूटान, जिनके पास आधिकारिक धर्म हैं, उनको कानून से बाहर रखा गया है। अधिनियम के संशोधन में अहमदिया, शिया और हजारा जैसे अल्पसंख्यकों को शामिल नहीं किया गया है, जिनका अफगानिस्तान और पाकिस्तान में उत्पीड़न का लंबा इतिहास है। "नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 स्पष्ट रूप से मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है। यह अधिनियम हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को लाभ देता है, लेकिन इस्लाम धर्म से संबंधित व्यक्तियों को समान लाभ नहीं देता। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 व्यक्ति के मूल या आंतरिक गुण के आधार पर भेदभाव करता है। यह अंतर के आधार पर एक उचित वर्गीकरण नहीं है।" इंसानियत का कत्ल है क्यूँ कि आप किसी मजलूम को मदद से पहले उसका धर्म पूछ रहे हैं अगर गैर मुस्लिम है तो मदद, मुस्लिम है तो कोई शरण नहीं किसी भी धर्म में ऐसी व्याख्या नहीं है। और इस्लाम मे तो कटाई नहीं है
मोहम्मद मुस्तफा (सल्लo) ने कहा कि अगर आपका पड़ोसी भूखा सो गया तो आपका खाना हराम। ये नहीं कहा कि आपका मुस्लमान पड़ोसी ब्लकि पड़ोसी कहा पड़ोसी कोई भी हो सकता है
घुसपैठी और शरणार्थी की पहचान का धार्मिक आधार पर बँटवारा करने की नीति मानवताविरोधी है। ध्रुवीकरण के माध्यम से सत्ता प्राप्ति का लक्ष्य लोकतंत्र विरोधी है। देश के संविधान की मूल धारणा के खिलाफ इस बिल का शांतिपूर्ण विरोध कर जूही लाल कॉलोनी स्थित 22 ब्लॉक मदरसा तालिमुल कुरान अहले सुन्नत से कुआं वाला चौराहा, जूही लाल कॉलोनी तक जुमे की नमाज़ के बाद हाथो में काली पट्टी बाँध कर पैदल मार्च निकाल कर विरोध दर्ज किया गया उक्त विरोध उलमा ए एकराम व मुस्लिम समाज के लोगों के साथ विरोध दर्ज बिल की प्रतियां जलायी गई वही के जाबांज़ हिन्दू मुस्लिम साथियो के साथ किया। सरपरस्ती मुफ़्ती काज़िम रज़ा ओवैसी, हाफ़िज़ शब्बीर हुसैन, इम्तियाज अहमद, इज़हार आलम, मोहम्मद इमरान खान, छंगा पठान, नाफिसउल्लाह सिद्दीक़ी ,जाकिर खान, नाज़िश हुसैन, दिलशाद बरकाती, साकिब क़ुरैशी, अशरफ अली, सादिक अली, निहाल खान, सरवर हुसैन, अब्दुल राजाक, सलमान क़ुरैशी, रिज़वान अहमद, अरबाज़ अहमद, सादाब अहमद, असलम खान, मतीन सिद्दीक़ी, कलीम अहमद, मोहम्मद अरशद सिद्दीकी, अनवर सिद्दीकी, आदि तमाम लोग मौजूद रहे