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मुसलमानों ने जिन्ना का पैगाम ठुकराया, आर एस एस ने अपनाया कानून को मंज़ूरी देने पर पुनर्विचार करें महामहिम
December 13, 2019 • Faisal Hayat • Social


 कानपुर । दिसंबर देश में नागरिकता संशोधन बिल एवं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लागू करने में उतारु केंद्र सरकार ने संविधान की धज्जियां उड़ाकर नागरिकता संशोधन बिल कानून देश मे थोपना चाहती है उसके विरोध मे जुमा की नमाज़ के बाद काजी ए शहर मौलाना मोहम्मद आलम रज़ा खाँ नूरी की कयादत व मोहम्मदी यूथ ग्रुप के ज़ेरे एहतिमाम यतीमखाना चौराहा पर ज़ोरदार प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इज़हार किया। प्रदर्शन के दौरान ही राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को देकर इस काले कानून को मंज़ूरी पर पुनर्विचार कर काला कानून को वापस करने के केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया।जुमा की नमाज़ के बाद यतीमखाना चौराहा पर हज़ारों की तादात मे शहर के उलेमा ए दिन मस्जिदों के इमाम मोहम्मदी यूथ ग्रुप के मेम्बर्स व शहर की आवाम जमा होने लगी उनमे काला कानून के खिलाफ बहुत गुस्सा था वह ज़ोरदार नारे भी लगा रहे थे काला कानून वापस लो, देश का बंटवारा करने वालों होश मे आओं, संविधान विरोधी बिल वापस लो, मुसलमानों ने जिन्ना के पैगाम को ठुकराया आर एस एस ने जिन्ना के पैगाम को अपनाया, हिंदुस्तान ज़िंदाबाद आदि नारे लगा रहे थे उनके हाथों मे स्लोगन लिखी तख्तियां भी थी जिसमें मज़हबों मे नफरत फैलाने वाले होश मे आओं, राष्ट्रपति जी कानून को मंज़ूरी न देना, मुसलमानों की भावनाओं को मत भड़काओं, हमारा देश शांति के लिए जाना जाता है उसे हिंसक न बनाओं, अपने ही देश मे नागरिकता का प्रमाण देना अपमान है, मुसलमानों से मोदी सरकार को इतनी नफरत क्यो लिखा था। प्रदर्शन के बीच मे ही राष्ट्रपति जी को सम्बोधित ज्ञापन को लेने अपर जिलाधिकारी कानपुर आए काज़ी ए शहर  मौलाना मोहम्मद आलम रज़ा खाँ नूरी ने उनको ज्ञापन दिया ज्ञापन महबूब आलम खान ने पढ़कर सुनाया ज्ञापन लेने के बाद अपर जिलाधिकारी ने काजी ए शहर से कहा की आज ही आपका मांग पत्र राष्ट्रपति भवन भेज दिया जाएगा। मोहम्मदी यूथ ग्रुप के अध्यक्ष इखलाक अहमद डेविड ने कहा कि मुसलमानों ने जिन्ना के पैगाम को ठुकराकर भारत मे रहने का फैसला किया नागरिकता संशोधन बिल लागू कर केंद्र सरकार ने गोडसे-जिन्ना व ब्रिटिश हुकूमत का साथ देने वालो को खुश करने का कार्य किया अपने ही देश मे नागरिकता साबित करना किसी अपराध से कम नही है। मुसलमानों मे दहशत पैदा करने के मकसद से कानून की रुपरेखा तैयार की गयी है। मुसलमान अपने गम गुस्से का इज़हार शांति के साथ कर रहा है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों मे कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे है राज्य जल रहे है और केन्द्र की मोदी सरकार सिर्फ तमाशा देख रही है। काजी ए शहर ने कहा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस कानून की मंज़ूरी पर पुनर्विचार कर केंद्र सरकार को काला कानून को वापस लेने का निर्देश देने व संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला बिल लाने के लिए स्पष्टीकरण मांगने का अनुरोध किया।
प्रदर्शन व ज्ञापन मे काज़ी ए शहर मौलाना मोहम्मद आलम रज़ा खाँ नूरी, इखलाक अहमद डेविड, मौलाना मोहम्मद मेराज चिश्ती, मुफ्ती शाकिब अदीब, कारी तय्यैब अली, हाफिज़ माज़ सलामी, मौलाना मतीउर रहमान, महबूब आलम खान, इस्लाम खाँ आज़ाद, हाफिज़ मोहम्मद कफील, इस्लाम खाँ चिश्ती, हाफिज़ मोहम्मद शोएब, हाफिज़ मोहम्मद अहद, हाफिज़ शहनेहाल, हाफिज़ मोहम्मद शकील, मोहम्मद जिशान, मोहम्मद साबिर, मोहम्मद शारिब, बब्लू खान आदि सैकड़ो लोग थे।