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सहाबा रजि. का दर्जा बहुत बुलन्द है :- मौलाना उसामा क़ासमी
November 8, 2019 • Faisal Hayat



अंजुमन इस्लामिया बच्चा कमेटी के तत्वाधान में पटकापुर में जलसा सीरतुन्नबी व सीरते सहाबा का आयोजन

कानपुर :- जमीअत उलमा शहर व मज्लिस तहफ्फुज़ खत्मे नुबुव्वत कानपुर के ज़ेरे एहतमाम माहे रहमते आलम मनाया जा रहा है, जिसके तहत अंजुमन इस्लामिया बच्चा कमेटी के द्वारा नवाब साहब का हाता पटकापुर में जलसा सीरतुन्नबी व सीरते सहाबा का आयोजन किया गया। जलसे में तषरीफ लाये रहमते आलम महीने के संयोजक हज़रत मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी क़ाज़ी ए शहर कानपुर व अध्यक्ष जमीअत उलमा उत्तर प्रदेष ने अपने बयान में कहा कि हर मुसलमान को अपने जे़हन में यह बात उतार लेनी चाहिए कि अल्लाह ने नुबुव्वत का सिलसिला नबी स.अ.व. पर पूरा कर दिया, अब क़यामत तक कोई नया नबी आने वाला नहीं है। अल्लाह न आखिरी नबी पर आखिरी किताब भी उतार दिया अब कोई नई आसमानी किताब नहीं आ सकती। मौलाना ने सहाबा किराम रजि0 का ज़िक्र करते हुए कहा कि अगर किसी ने ईमान की हालत में नबी स.अ.व. की एक झलक भी देख लिया या नबी स.अ.व. ने उस पर अपनी निगाह डाल दिया तो उसको सहाबी कहा जायेगा। अब यहां पर किसी डिक्षनरी से अर्थ नहीं लिया जायेगा , 'सहाबा' शब्द केवल हुजूर के शागिर्दां(सीखने वाले) और आप स.अ.व. ने जिसको देख लिया या जिसने आप स.अ.व. को ईमान की हालत में देख लिया उसके लिये खास हो गया। अब कोई कितना ही इबादत करने वाला या नेक इंसान क्यों ना बन जाये लेकिन वह किसी सहाबा के दर्जे तक नहीं पहुंच सकता। सहाबा रजि. का दर्जा बहुत बुलन्द है। सहाबा रजि. ने ही पूरी दुनिया में इस्लाम को पहुंचाया है। सहाबा की तर्बियत खुद हुजूर स.अ.व. ने की है और उनका इम्तेहान अल्लाह ने लिया है। इसलिये अब उनपर कोई उंगली उठाने का सवाल नहीं उठता , जो लोग उनकी अज़मत पर शक करते हैं उन्हें मालूम होना चाहिये कि दुनिया में सबको जीने का अधिकार है लेकिन आखिरत में कोई नही बचा पायेगा। उन्होंने कहा कि दीन के मामलों में हमें अपनी अक़्ल पर ज्यादा ऐतबार नहीं करना चाहिए क्योंकि इंसानी अक्ल जहां एक तरफ बहुत अच्छे-अच्छे काम कराती है तो वहीं हमारी अक्ल बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां भी कराती है। मौलाना ने कहा कि नबी स.अ.व. का फरमान है कि सारे सहाबा सितारों की तरह हैं जिसका भी दामन थाम लोगे निजात पा जाओगे। 
अंत में मौलाना उसामा ने अयोध्या विवाद पर आने वाले निर्णय के सम्बन्ध में लोगों से अपील करते हुए कहा कि हमेषा सब लोग हमारे दुष्मन नहीं होते हैं, कुछ लोग गड़बड़ी फैलाते हैं। इस लिये जहां भी रहें होषियार रहें और कुरआन की बताई हुई तालीमात को सामने रख कर मुहब्बत का पैग़ाम आम करें। जब कुरआन और सुन्नत को अपनायेंगें तो हर इंसान से हम सच्ची मुहब्बत करेंगे। ना किसी से डरेंगे और ना किसी से दिखावे की मुहब्बत करेंगे। हमने और हमारे बुजुर्गां ने साथ मिलकर और बड़ी-बड़ी कुर्बानियां देकर इस देष को आज़ाद कराया तो इस देष की हिफाज़त की भी ज़िम्मेदारी हमारी ही है। 
मौलाना हारिस अब्दुर्ररहीम फारूक़ी ने कहा कि नबी स.अ.व. से सच्ची मुहब्बत का तक़ज़ा है कि आप स.अ.व. की सुन्नत पर अमल ही हमारी प्राथमिकता हो। सहाबा से मुहब्बत सिर्फ मोमिन ही कर सकता है, जो उनसे मुहब्बत करेगा अल्लाह उनसे मुहब्बत करेगा।
इससे पूर्व जलसे का शुभारम्भ क़ारी मुजीबुल्लाह इरफानी ने तिलावत ए कुरआन पाक से किया। शायर हाफिज़ शुऐब बलरामपुरी ने नअत का नज़राना पेष किया।़ मस्जिदे नूर पटकापुर के इमाम मुफ्ती इज़हार मुकर्रम क़ासमी ने संचालन के कर्तव्यों को पूरा किया। जलसे में क़ारी अब्दुल मुईद चौधरी, हाफिज़ रेहान अली के अलावा अन्य उलमा एवं सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। जलसे के संचालक और अंजुमन इस्लामिया बच्चा कमेटी के पदाधिकारियों से संयुक्त रूप से आये हुए सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।